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गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

समय नी मळे


समय तू मळे क्यों नी रे, सगला लोग थारा नाम से रड़िरिया। जलधारीजी का गोड़ा घणा दुखे। डाक्टर नी कियो कि सौंदारे घुमवा जाओ। पण जाय कसा समय नी मळे। तेलंगजी की तोंद घणी वढ़ी गी, उनके डाक्टर नी दौड़ लगाने को बोल्यो हे। उनके भी भई तू नी मळे तो वी केसा दौड़े भला। सीमा बेण बिचारी योगशाला जाणे वाटे दीवाली से थारी राह तकी री। तू उनसे भी नी मळे। कल संपादकजी ने आवा में घणी देर कर दी। अणीमें दीक्षितजी की योग घड़ी टली गी। म्हाने उनसे कियो दीक्षितजी तम सौंदारे योग किया करो नी। दन भर भोग का बाद योग कईं काम आवे? केणे लग्या समय नी मळे। तमारो तो समय भतीजो हे जब चावे तब मळी जाय, हमारे तो मळे जी नी। दिनेश काको लेख लिखनो चावे पण उके भी यो मुओ समय को रोणोंज आडो आवे। तू घड़ी-घड़ी मुम्बई जई ने फिल्लमवाला न के तो मळी आय न याँ को याँ इना बापड़ा न से क्यों नी मळे। देख इनके कईं हुइग्यो तो पाप को भागी तूज वणेगो। थारो काको होणे का नाते म्हारे भी पाप लगेगो। पण तू भी एकलो कईं करे, काँ काँ जाय। तू म्हारी मान तो ऐसो कर, इनके अपणो एक-एक फोटू दई दे। नई तो ऐसो कर वो कोनसी बुक बोले आजकल नरा लोग उकापे टूटी रिया? हाँ मुई फेसबुक। इका पे फोटू डाल दे। फेसबुक देखा वास्ते सबके समय मळी जाय। अपणी सेहत का वास्ते की का पास भी समय नी हे।
सावधानः इनी वार्ता का सभी पात्र सच्ची-मुच्ची का हे। कोणी के मिरची लगे तो लगे, हूँ मिठई नी खिलउँ।

3 टिप्‍पणियां:

  1. मामाजी खूब जमी तमारी वात..थोड़ी देर थाई गी...समय म्हारे सामने से चली गयो....समय बोल्यो म्हारे साथ चाळजो हमेशा....आपन मिलता रेंगा ....तभी तो कु , बापू बापडो ...समयने आपने कंबर थी बांधिने येसेई नि राखता था..विने समय की कदर करी तबी जमानो वाकी कदर करी रय्यो है ..है की नि सा..

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  2. सुरेशजी, नईदुनिया की याद अई गी...तम अबे बी वई हो कई?

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  3. PADKE KHOOB MAZA AAYA...
    AASHCHRYA KI BAAT TO YE HAI KI MUJHKO BHI SAMAY NAHI MILTA...

    - SAMAY

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