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शुक्रवार, 28 जनवरी 2011

कांटों से दोस्ती


किसी फिल्म का गीत है मिले न फूल तो कांटों से दोस्ती कर ली। शायद सैलाना महाराज दिलीपसिंहजी ने भी यही सोच कर केक्टस उद्यान विकसित किया होगा। रतलाम के नजदीक १४ किलोमीटर के फासले पर है सैलाना। किसी जमाने में छोटी सी रियासत थी। अब इसकी याद दिलाता है एक प्रवेश द्वार छोटा सा महल और महल के पिछवाड़े बना केक्टस गार्डन। कहते हैं महाराजा ने दूर-दूर से केक्टस की विभिन्न प्रजातियाँ लाकर अपने उद्यान में लगाई थीं। उद्यान अब भी मौजूद है, लेकिन महाराज नहीं रहे तो देखरेख पहले जैसी नहीं हो पाती। इसलिए विरान सा लगता है। बावजूद इसके देखने काबिल है। सैलाना के केक्टस गार्डन का अभी तक बस नाम ही सुन रखा था, देखने का प्रसंग हाल ही एक विवाह समारोह में जाने पर आया। यह गार्डन करीब पचास साल पुराना है। महल २०० साल पुराना है। यहाँ १२०० प्रजातियाँ हैं केक्टस की। चालीस फुट ऊँचा करीब एक क्विंटल वजनी केक्टस भी है। चंद्रमुखी केक्टस और अठारह साल में एक बार फूल देने वाला केक्टस भी यहाँ है। पहले यहाँ टेनिस ग्राउंड था जिसे महाराजा ने केक्टस गार्डन में बदल दिया। इसके अलावा एक केक्टस गार्डन पंचकुला हरियाणा में भी है। यह डा.जेएस सरकारिया ने स्थापित किया था। यह एशिया का सबसे बड़ा केक्टस गार्डन है और यहाँ ३५०० प्रजातियाँ हैं केक्टस की। भुवनेश्वर उड़ीसा में भी एक केक्टस गार्डन है। पाँच सौ एकड़ में फैले इस बगीचे को १९८५ में डा.प्रेमानंद दास ने बनाया था। यहाँ भी अनेक प्रजातियाँ हैं। गुलाब ही करीब ३०० प्रकार के हैं। तो कांटों से दोस्ती करने वालों की भी कमीं नहीं है। किसी फिल्म का एक और गीत है-फूलों से दोस्ती है, कांटों से यारी है ऐसे मजे से यारों जिंदगी हमारी है। गुरुदत्त ने भी प्यासा में गाया था-हमने तो जब कलियाँ माँगी कांटों का हार मिला।

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी जानकारी सर, मजा आ गया जानकर। आपके पास जो ज्ञान का भंडार है, उससे जो प्रसाद मिलता है, तो आनंद का अहसास होता है और खुशकिस्मती का भी कि आपसे हम जुड़े हुए हैं.....


    धन्यवाद

    जितेश चंद्रवंशी

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